*राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा स्वामी विवेकानंद का आग्रह क्यों?*
स्वामी विवेकानंद द्वारा कैलिफोर्निया के शेक्सपियर क्लब में सिस्टर निवेदिता और स्वामी तुरियानंद की मौजूदगी में बीफ पर जो बयान दिया था उसपर अक्सर सुर्खिया बटोरी जाती है। स्वामी विवेकानन्द का संपूर्ण साहित्य भाग ३ पृष्ठ क्र ५३६ पर जिसका जिक्र है। जो साहित्य प्रकाशन उन्ही के रामकृष्ण परमहंस का प्रकाशन है। हेगडेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जब स्थापना हुई थी तब स्वामी विवेकानंद को आदर्श के तौर पर स्वीकारा गया था ? इतिहास उठाकर देखे तो इसका कोई संदर्भ नही मिलेगा । फिर उसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में स्वामी विवेकानंद के आदर्शवाद की थ्योरी कब और कैसे गढ़ी गई ? संशोधन का विषय है। कभी भी आप विधार्मियो को मुंह तोड़ जवाब तभी दे सकते है जब आप के स्वयं के आदर्श और स्वयं के सिद्धांत पर आप गौरव अनुभव कर सके।
बीफ को लेकर जब हम विधर्मीयो को टारगेट करने में लग जाते है तो दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शमसुल नामक महाशय बीबीसी को एक मुलाकात देकर स्वामी विवेकानंद के उसी कैलिफोर्निया में दिए भाषण का जिक्र कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जरिए हिंदुओ को निशाना बनाने में जुट जाते है । तो कभी रवीश कुमार जैसे पत्रकार भी उसी कैलिफोर्निया के बयान का हवाला देकर "बीफ को साम्प्रदायिक चश्मे से न देखा जाए" इस तरह का पाठ पढ़ाने आगे आते है। अब सवाल यह है के स्वामी विवेकानंद के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतना आग्रह क्यों ? जब के स्वामी दयानंद जैसे वैदिक धर्म और स्वदेशी के प्रणेता का साफ पर्याय सामने है।
संघ के इंद्रेश कुमार की नीतियां क्या संघ के इसी आदर्शवाद का नतीजा है ? वैसे कहा जाए तो आजादी के बाद गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तरप्रदेश ने हिंदुत्व को बचाने में सहायक कदम उठाए। जनसंघ का वजूद इन राज्यों में ही था। यह सब डॉ मूंजे, सावरकर, हेगडेवार, स्वामी श्रद्धानंद, महात्मा हंसराज, भाई परमानंद जैसे लोगो के वैचारिक आंदोलन का नतीजा था।
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© रोहित जगदाले पाटील
परभणी, महाराष्ट्र
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